jab subh ki dahleez pe bazaar lagega | जब सुब्ह की दहलीज़ पे बाज़ार लगेगा

  - Akbar Hyderabadi
जबसुब्हकीदहलीज़पेबाज़ारलगेगा
हरमंज़र-ए-शबख़्वाबकीदीवारलगेगा
पलभरमेंबिखरजाएँगेयादोंकेज़ख़ीरे
जबज़ेहनपेइकसंग-ए-गिराँ-बारलगेगा
गूँधेहैंनईशबनेसितारोंकेनएहार
कबघरमिराआईना-ए-अनवारलगेगा
गरसैल-ए-ख़ुराफ़ातमेंबहजाएँयेआँखें
हरहर्फ़-ए-यक़ींक़लमा-ए-इंकारलगेगा
हालातबदलेतोतमन्नाकीज़मींपर
टूटीहुईउम्मीदोंकाअम्बारलगेगा
खिलतेरहेगरफूललहूमेंयूँँही'अकबर'
हरफ़स्लमेंदिलअपनासमन-ज़ारलगेगा
  - Akbar Hyderabadi
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