fitne ajab tarah ke saman-zaar se uthe | फ़ित्ने अजब तरह के समन-ज़ार से उठे

  - Akbar Hyderabadi
फ़ित्नेअजबतरहकेसमन-ज़ारसेउठे
सारेपरिंदशाख़-ए-समर-दारसेउठे
दीवारनेक़ुबूलकियासैल-ए-नूरको
साएतमाम-तरपस-ए-दीवारसेउठे
जिनकीनुमूमेंथीमुआविनहवाकोई
ऐसेभीगुलज़मीन-ए-ख़ास-ओ-ख़ारसेउठे
तस्लीमकीसिरिश्तबसईजाबऔरक़ुबूल
सारेसवालजुरअत-ए-इंकारसेउठे
शहर-ए-तअल्लुक़ातमेंउड़तीहैजिनसेख़ाक
फ़ित्नेवोसबरऊनत-ए-पिंदारसेउठे
आँखोंकोदेखनेकासलीक़ाजबगया
कितनेनक़ाबचेहरा-ए-असरारसेउठे
तस्वीर-ए-गर्दबनगया'अकबर'चमनतमाम
कैसेग़ुबारवादी-ए-कोहसारसेउठे
  - Akbar Hyderabadi
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