tareeq-e-ishq men mujh ko koi kaamil nahin milta | तरीक़-ए-इश्क़ में मुझ को कोई कामिल नहीं मिलता

  - Akbar Allahabadi
तरीक़-ए-इश्क़मेंमुझकोकोईकामिलनहींमिलता
गएफ़रहादमजनूँअबकिसीसेदिलनहींमिलता
भरीहैअंजुमनलेकिनकिसीसेदिलनहींमिलता
हमींमेंगयाकुछनक़्सयाकामिलनहींमिलता
पुरानीरौशनीमेंऔरनईमेंफ़र्क़इतनाहै
उसेकश्तीनहींमिलतीइसेसाहिलनहींमिलता
पहुँचनादादकोमज़लूमकामुश्किलहीहोताहै
कभीक़ाज़ीनहींमिलतेकभीक़ातिलनहींमिलता
हरीफ़ोंपरख़ज़ानेहैंखुलेयाँहिज्र-ए-गेसूहै
वहाँपेबिलहैऔरयाँसाँपकाभीबिलनहींमिलता
येहुस्नइश्क़हीकाकामहैशुबहकरेंकिसपर
मिज़ाजउनकानहींमिलताहमारादिलनहींमिलता
छुपाहैसीनारुख़दिल-सिताँहाथोंसेकरवटमें
मुझेसोतेमेंभीवोहुस्नसेग़ाफ़िलनहींमिलता
हवासे-ओ-होशगुमहैंबहर-ए-इरफ़ान-ए-इलाहीमें
यहीदरियाहैजिसमेंमौजकोसाहिलनहींमिलता
किताब-ए-दिलमुझेकाफ़ीहै'अकबर'दर्स-ए-हिकमतको
मैंस्पेन्सरसेमुस्तग़नीहूँमुझसेमिलनहींमिलता
  - Akbar Allahabadi
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