ghamza nahin hota ki ishaara nahin hota | ग़म्ज़ा नहीं होता कि इशारा नहीं होता

  - Akbar Allahabadi
ग़म्ज़ानहींहोताकिइशारानहींहोता
आँखउनसेजोमिलतीहैतोक्याक्यानहींहोता
जल्वाहोमा'नीकातोसूरतकाअसरक्या
बुलबुलगुल-ए-तस्वीरकाशैदानहींहोता
अल्लाहबचाएमरज़-ए-इश्क़सेदिलको
सुनतेहैंकियेआरिज़ाअच्छानहींहोता
तश्बीहतिरेचेहरेकोक्यादूँगुल-ए-तरसे
होताहैशगुफ़्तामगरइतनानहींहोता
मैंनज़्अ'मेंहूँआएँतोएहसानहैउनका
लेकिनयेसमझलेंकितमाशानहींहोता
हमआहभीकरतेहैंतोहोजातेहैंबदनाम
वोक़त्लभीकरतेहैंतोचर्चानहींहोता
  - Akbar Allahabadi
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