na rooh-e-mazhab na qalb-e-aarif na sha'iraana zabaan baaki | न रूह-ए-मज़हब न क़ल्ब-ए-आरिफ़ न शाइ'राना ज़बान बाक़ी

  - Akbar Allahabadi
रूह-ए-मज़हबक़ल्ब-ए-आरिफ़शाइ'रानाज़बानबाक़ी
ज़मींहमारीबदलगईहैअगरचेहैआसमानबाक़ी
शब-ए-गुज़िश्ताकेसाज़सामाँकेअबकहाँहैंनिशानबाक़ी
ज़बान-ए-शमा-ए-सहरपेहसरतकीरहगईदास्तानबाक़ी
जोज़िक्रआताहैआख़िरतकातोआपहोतेहैंसाफ़मुनकिर
ख़ुदाकीनिस्बतभीदेखताहूँयक़ीनरुख़्सतगुमानबाक़ी
फ़ुज़ूलहैउनकीबद-दिमाग़ीकहाँहैफ़रियादअबलबोंपर
येवारपरवारअबअबसहैंकहाँबदनमेंहैजानबाक़ी
मैंअपनेमिटनेकेग़ममेंनालाँउधरज़मानाहैशादख़ंदाँ
इशाराकरतीहैचश्म-ए-दौराँजोआनबाक़ीजहानबाक़ी
इसीलिएरहगईहैंआँखेंकिमेरेमिटनेकारंगदेखें
सुनूँवोबातेंजोहोशउड़ाएँइसीलिएहैंयेकानबाक़ी
तअ'ज्जुबआताहैतिफ़्ल-ए-दिलपरकिहोगयामस्त-ए-नज़्म-ए-'अकबर'
अभीमिडिलपासतकनहींहैबहुतसेहैंइम्तिहानबाक़ी
  - Akbar Allahabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy