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AKASH
kaashi kaaba ek taraf teraa koocha ek taraf
kaashi kaaba ek taraf teraa koocha ek taraf | काशी काबा एक तरफ़ तेरा कूचा एक तरफ़
- AKASH
काशी
काबा
एक
तरफ़
तेरा
कूचा
एक
तरफ़
एक
तरफ़
दारू
वारु
तेरा
बोसा
एक
तरफ़
- AKASH
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कहते
हैं
उम्र-ए-रफ़्ता
कभी
लौटती
नहीं
जा
मय-कदे
से
मेरी
जवानी
उठा
के
ला
Abdul Hamid Adam
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अब
तो
उतनी
भी
मुयस्सर
नहीं
मय-ख़ाने
में
जितनी
हम
छोड़
दिया
करते
थे
पैमाने
में
Divakar Rahi
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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शायद
शराब
पीके
तुम्हें
फ़ोन
मैं
करूँँ
बस
इसलिए
शराब
कभी
पी
नहीं
मैंने
Tanoj Dadhich
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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जो
उन
को
लिपटा
के
गाल
चूमा
हया
से
आने
लगा
पसीना
हुई
है
बोसों
की
गर्म
भट्टी
खिंचे
न
क्यूँँकर
शराब-ए-आरिज़
Ahmad Husain Mail
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किस
की
होली
जश्न-ए-नौ-रोज़ी
है
आज
सुर्ख़
मय
से
साक़िया
दस्तार
रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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बढ़ाई
मय
जो
मोहब्बत
से
आज
साक़ी
ने
ये
काँपे
हाथ
कि
साग़र
भी
हम
उठा
न
सके
Majrooh Sultanpuri
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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आती
नहीं
अब
याद
भी
होते
नहीं
नाशाद
भी
तूने
लगाए
ज़ख़्म
थे
तो
तू
लगाती
खाद
भी
हैं
आपके
बर्बाद
गर
हैं
आपके
आबाद
भी
कहने
लगे
हैं
झूट
अब
मिलने
लगी
है
दाद
भी
थे
मज़हबी
इतने
नहीं
हम
थे
कभी
फ़रहाद
भी
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तुम्हारे
ग़म
कभी
ओझल
न
होंगे
हमेशा
हम
मगर
बेकल
न
होंगे
ख़ुदा
तुमको
कहेगा
फिर
भला
कौन
ज़माने
में
अगर
पागल
न
होंगे
लगी
है
ऐसी
इक
आँखों
में
तस्वीर
कलर
जिसके
कभी
भी
डल
न
होंगे
हँसी
पे
तो
यक़ीं
कर
सकते
हैं
हम
मगर
आँसू
रिलायेबल
न
होंगे
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हँसाया
भी
कभी
मुझको
रुलाया
भी
ये
थोड़ा
थोड़ा
मुझको
हिज्र
भाया
भी
तेरे
जाने
का
जाएगा
नहीं
ये
ग़म
अगर
तू
पास
मेरे
लौट
आया
भी
वो
आलम
देखा
है
तन्हाई
का
मैंने
नहीं
मुझ
सेे
था
करता
बातें
साया
भी
कभी
उसने
बनाना
है
नहीं
अपना
कभी
होने
नहीं
देना
पराया
भी
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क्यूँ
रहती
हलकान
है
जानाँ
तू
मेरी
भगवान
है
जानाँ
हाथ
में
तेरा
हाथ
अगर
हो
लगता
सब
आसान
है
जानाँ
तेरी
आँखें
पढ़
सकता
हूँ
मुझको
इतना
ज्ञान
है
जानाँ
तेरे
दिल
में
आके
जाना
दुनिया
इक
ज़िंदान
है
जानाँ
मुझको
अच्छा
मत
समझो
तुम
मुझ
में
इक
शैतान
है
जानाँ
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समुंदर
जैसी
आँखें
उसकी
देखीं
जब
हमें
क्यूँ
दी
है
बीनाई
समझ
आई
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