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AKASH
naam teraa gun-gunaata ja raha hooñ
naam teraa gun-gunaata ja raha hooñ | नाम तेरा गुन-गुनाता जा रहा हूँ
- AKASH
नाम
तेरा
गुन-गुनाता
जा
रहा
हूँ
तीरगी
को
मैं
मिटाता
जा
रहा
हूँ
लुत्फ़
आता
है
उदासी
में
मुझे
अब
हर
ख़ुशी
में
ग़म
मिलाता
जा
रहा
हूँ
छोड़ने
आया
नहीं
है
कोइ
मुझको
हाथ
मैं
किसको
हिलाता
जा
रहा
हूँ
बज
रहे
हैं
रात
के
दो
मैं
मुसलसल
गीत
नुसरत
के
बजाता
जा
रहा
हूँ
- AKASH
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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चराग़ों
को
आँखों
में
महफ़ूज़
रखना
बड़ी
दूर
तक
रात
ही
रात
होगी
Bashir Badr
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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तेरी
आँखों
के
लिए
इतनी
सज़ा
काफ़ी
है
आज
की
रात
मुझे
ख़्वाब
में
रोता
हुआ
देख
Abhishek shukla
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क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
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Farhat Ehsaas
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दफ़्तर
में
तय
किया
था
कि
तारे
गिनेंगे
आज
लेकिन
हमें
पहुंचते
ही
घर
नींद
आ
गई
Balmohan Pandey
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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आज
की
रात
भी
गुज़री
है
मिरी
कल
की
तरह
हाथ
आए
न
सितारे
तिरे
आँचल
की
तरह
Ameer Qazalbash
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रोते
फिरते
हैं
सारी
सारी
रात
अब
यही
रोज़गार
है
अपना
Meer Taqi Meer
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आती
नहीं
अब
याद
भी
होते
नहीं
नाशाद
भी
तूने
लगाए
ज़ख़्म
थे
तो
तू
लगाती
खाद
भी
हैं
आपके
बर्बाद
गर
हैं
आपके
आबाद
भी
कहने
लगे
हैं
झूट
अब
मिलने
लगी
है
दाद
भी
थे
मज़हबी
इतने
नहीं
हम
थे
कभी
फ़रहाद
भी
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AKASH
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मुहब्बत
का
नया
इक
सीन
करते
हैं
कहाँ
हम
ज़ीस्त
अब
ग़मगीन
करते
हैं
तेरे
बेरंग
मौसम
याद
आते
हैं
मुझे
किस
होंठ
जब
रंगीन
करते
हैं
हमारे
दोस्तों
की
ख़ासियत
है
ये
हमारी
वो
बहुत
तौहीन
करते
हैं
मुझे
वो
देखकर
के
थे
कभी
कहते
मेरे
दिल
में
सदा
शाहीन
करते
हैं
लगे
आसान
राहें
हर
मुसाफ़िर
को
यही
हम
सोच
रस्ते
क्लीन
करते
हैं
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नयन
में
आप
के
जीवन
बिताना
है
मुझे
स्पेस
स्टेशन
बनाना
है
AKASH
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आपकी
कोई
निशानी
भी
नहीं
है
कम
हमारी
ज़िंदगानी
भी
नहीं
है
कोई
समझे
काश
दरिया
की
उदासी
शांत
रहता
है
रवानी
भी
नहीं
है
आग
बढ़ती
जा
रही
है
दिल
मकाँ
में
देखना
है
बस
बुझानी
भी
नहीं
है
बात
मैंने
माननी
दिल
की
नहीं
है
अब
मुझे
अपनी
चलानी
भी
नहीं
है
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AKASH
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बस
निकलता
ही
नहीं
है
दम
हमारा
तुम
समझ
सकते
नहीं
हो
ग़म
हमारा
हो
गया
है
हक़
अब
उस
पर
दूसरों
का
मिट
गया
है
यार
अब
परचम
हमारा
अब
सितारे
पूछते
हैं
रोज़
मुझ
सेे
कब
करेगा
चाँद
ये
चम
चम
हमारा
फोल्डर
इक
याद
का
अब
है
मिटाना
हैंग
करता
है
बहुत
सिस्टम
हमारा
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