har-qadam marhala-e-sabr-o-raza ho jaise | हर-क़दम मरहला-ए-सब्र-ओ-रज़ा हो जैसे

  - Ajiz Matvi
हर-क़दममरहला-ए-सब्र-ओ-रज़ाहोजैसे
ज़िंदगीमारका-ए-कर्ब-ओ-बलाहोजैसे
यूँँगुज़रजातेहैंदुनियासेअदमकेराही
रहमेंनक़्श-ए-क़दम-ए-राह-नुमाहोजैसे
चुपहुएजातेहैंयूँँदेखकेसूरतमेरी
हालमेरामिरेचेहरेपेलिखाहोजैसे
इसतरहकाटरहाहूँमैंशब-ओ-रोज़-ए-हयात
हर-नफ़सअपनेलिएएकसज़ाहोजैसे
दश्तमेंजलतीहैंता-हद्द-ए-नज़रयूँँशमएँ
सर-ए-हर-ख़ारपेख़ून-ए-शोहदाहोजैसे
रिंदझिझकेतोबला-नोशोंनेमहसूसकिया
मयनहींजाममेंख़ून-ए-ग़ुरबाहोजैसे
यूँँशफ़क़-रंगसीहैआजगुलिस्ताँकीज़मीं
बरहना-पाकोईकाँटोंपेचलाहोजैसे
हरज़बाँपरमिरेमिटनेकेहैंचर्चेलेकिन
उनकेनज़दीकतोकुछभीहुआहोजैसे
आजइसअंदाज़सेआईमुझेहिचकी'आजिज़'
भूलनेवालेनेफिरयादकियाहोजैसे
  - Ajiz Matvi
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