zaKHmon ka do-shaala pahna dhoop ko sar par taan liya | ज़ख़्मों का दो-शाला पहना धूप को सर पर तान लिया

  - Aitbar Sajid
ज़ख़्मोंकादो-शालापहनाधूपकोसरपरतानलिया
क्याक्याहमनेकष्टकमाएकहाँकहाँनिरवानलिया
नक़्शदिएतिरीआशाओंकोअक्सदिएतिरेसपनोंको
लेकिनदेखहमारीहालतवक़्तनेक्यातावानलिया
अश्कोंमेंहमगूँधचुकेथेउसकेलम्सकीख़ुशबूको
मोमकेफूलबनानेबैठेलेकिनधूपनेआनलिया
बरसोंब'अदहमेंदेखातोपहरोंउसनेबातकी
कुछतोगर्द-ए-सफ़रसेभाँपाकुछआँखोंसेजानलिया
आँखपेहातधरेफिरतेथेलेकिनशहरकेलोगोंने
उसकीबातेंछेड़केहमकोलहजेसेपहचानलिया
सूरजसूरजखेलरहेथे'साजिद'हमकलउसकेसाथ
इकइकक़ौस-ए-क़ुज़हसेगुज़रेइकइकबादलछानलिया
  - Aitbar Sajid
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