aankhoñ se ayaan zakham ki gehraai to ab hai | आँखों से अयाँ ज़ख़्म की गहराई तो अब है

  - Aitbar Sajid
आँखोंसेअयाँज़ख़्मकीगहराईतोअबहै
अबभीचुकोवक़्त-ए-मसीहाईतोअबहै
पहलेग़म-ए-फ़ुर्क़तकेयेतेवरतोनहींथे
रगरगमेंउतरतीहुईतन्हाईतोअबहै
तारीहैतमन्नाओंपेसकरातकाआलम
हरसाँसरिफ़ाक़तकीतमन्नाईतोअबहै
कलतकमिरीवहशतसेफ़क़ततुमहीथेआगाह
हरगामपेअंदेशा-ए-रुस्वाईतोअबहै
क्याजानेमहकतीहुईसुब्होंमेंकोईदिल
शामोंमेंकिसीदर्दकीरा'नाईतोअबहै
दिल-सोज़येतारेहैंतोजाँ-सोज़येमहताब
दर-असलशब-ए-अंजुमन-आराईतोअबहै
सफ़-बस्ताहैंहरमोड़पेकुछसंग-ब-कफ़लोग
ज़ख़्म-ए-हुनरलुत्फ़-ए-पज़ीराईतोअबहै
  - Aitbar Sajid
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy