muhtaaj hum-safar ki masafat na thii mirii | मुहताज हम-सफ़र की मसाफ़त न थी मिरी

  - Aitbar Sajid
मुहताजहम-सफ़रकीमसाफ़तथीमिरी
सबसाथथेकिसीसेरिफ़ाक़तथीमिरी
हक़किससेमाँगताकिमकीनोंकेसाथसाथ
दीवार-ओ-बाम-ओ-दरकोज़रूरतथीमिरी
सचबोलकेभीदेखलियाउनकेसामने
लेकिनउन्हेंपसंदसदाक़तथीमिरी
मैंजिनपेमरमिटाथावोकाग़ज़केफूलथे
रस्मीमुकाल
मेंथेमोहब्बतथीमिरी
जोदूसरोंकेदुखथेवहीमेरेदुखभीथे
कुछऐसीमुख़्तलिफ़भीहिकायतथीमिरी
बसकुछउसूलथेजोब-हर-हालथेअज़ीज़
जानमकिसीसेवर्नाअदावतथीमिरी
  - Aitbar Sajid
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