ik nayi dastaan sunaane do | इक नई दास्ताँ सुनाने दो

  - Aisha Ayyub
इकनईदास्ताँसुनानेदो
आजकीनींदफिरगँवानेदो
बेड़ियाँतोड़करसमाजोंकीइश्क़मेंक़ैदहैंदिवानेदो
मेरेमाज़ीकेरेगज़ारोंमें
ख़तमिलेहैंमुझेपुरानेदो
आजरोएँगेहमभीजीभरके
ग़मतोबसएकहैबहानेदो
उसकोआज़ादकरचुकीहूँमैं
फिरभीकहताहैमुझकोजानेदो
एकचेहरेसेमैंपरेशाँहूँ
अबमुझेआईनेसजानेदो
रक़्सकरतीहैमुझमेंख़ामोशी
थकगईहैउसेसुलानेदो
  - Aisha Ayyub
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