barbaad-e-mohabbat ho kar bhi jeene ka sahaara ho na sakaa | बरबाद-ए-मोहब्बत हो कर भी जीने का सहारा हो न सका

  - Aish Meeruthi
बरबाद-ए-मोहब्बतहोकरभीजीनेकासहाराहोसका
इकदिलपेभरोसाथाअपनेवोभीतोहमाराहोसका
जलवोंकीफ़रावानीतौबादमभरमेंहुईंख़ीरानज़रें
वोसामनेबे-पर्दाथेमगरहमसेहीनज़ाराहोसका
आँखोंकीज़बानीशिकवा-ए-ग़मकरनाथाबहुतउनसेलेकिन
ख़ुदहुस्नपशेमाँहोजातायेहमसेगवाराहोसका
मानाकिभरीमहफ़िलथीमगरकाफ़ीथीमुझेदुज़्दीदानज़र
तस्कीन-ए-दिल-ए-मुज़तरकेलिएइतनासाइशाराहोसका
ग़ैरोंकीतरहमुँहतकतेरहेहरएककाहमइसमहफ़िलमें
आँखोंमेंछलकआएआँसूफिरज़ब्तकायाराहोसका
आईजोइधरमौज-ए-तूफ़ाँकश्तीथीशिकस्ताडूबगई
अफ़्सोसपयाम-ए-आफ़िय्यतदरियामेंकिनाराहोसका
हरबज़्म-ए-नशात'ऐश'हुईउसशोख़केजलवोंसेरौशन
काशाना-ए-ग़ममेंजल्वा-फ़गनलेकिनवोदिल-आराहोसका
  - Aish Meeruthi
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