mujh ko naa-karda gunah ka mo'tarif hona pada | मुझ को ना-कर्दा गुनह का मो'तरिफ़ होना पड़ा

  - Ain Tabish
मुझकोना-कर्दागुनहकामो'तरिफ़होनापड़ा
रस्मऐसीथीकिख़ुदसेमुन्हरिफ़होनापड़ा
कोईभीमुझसाथाबेबाकबज़्म-ए-शौक़में
इसतरहमुझकोसभोंसेमुख़्तलिफ़होनापड़ा
एकहीशयथीकिजिसपरबचरहाथाए'तिमाद
पसमुझेअपनीअनासेमुत्तसिफ़होनापड़ा
वोयक़ीननराज़-अंदर-राज़थालेकिनउसे
एकदिनमुझना-तवाँपरमुन्कशिफ़होनापड़ा
क्याबताऊँमा'बद-ए-तन्हाईमेंमुझरिंदको
उम्र-भरकेवास्तेक्यूँँमोतकिफ़होनापड़ा
  - Ain Tabish
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