kaise afsoon the vahaañ kaise fasaane the udhar | कैसे अफ़्सूँ थे वहाँ कैसे फ़साने थे उधर

  - Ain Tabish
कैसेअफ़्सूँथेवहाँकैसेफ़सानेथेउधर
ज़िंदगीतुझसेत'अल्लुक़केबहानेथेउधर
क्याअजबख़्वाबकेख़ुशबूकेठिकानेथेउधर
अबतोकुछयादनहींकौनज़मानेथेउधर
येनहींयादकिवोबाग़थाकिसकूचेमें
इसक़दरयादहैकुछफूलखिलानेथेउधर
एकबस्तीथीहुईवक़्तकेअंदोहमेंगुम
चाहनेवालेबहुतअपनेपुरानेथेउधर
हमइधरआएतोवोअर्ज़-ए-करमछूटेगी
मम्लिकतइश्क़कीथीग़मकेख़ज़ानेथेउधर
  - Ain Tabish
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy