jee rahe hain aafiyat men to hunar KHvaabon ka hai | जी रहे हैं आफ़ियत में तो हुनर ख़्वाबों का है

  - Ain Tabish
जीरहेहैंआफ़ियतमेंतोहुनरख़्वाबोंकाहै
अबभीलगताहैकियेसारासफ़रख़्वाबोंकाहै
जीलगारक्खाहैयूँँता'बीरकेऔहामसे
ज़िंदगीक्याहैमियाँबसएकघरख़्वाबोंकाहै
रातचलतीरहतीहैऔरजलतारहताहैचराग़
एकबुझताहैतोफिरनक़्श-ए-दिगरख़्वाबोंकाहै
रंगबाज़ार-ए-ख़िरदकाऔरयेमेराजुनूँ
इकसितारागुम्बद-ए-अफ़्लाकपरख़्वाबोंकाहै
रातकादरियाऔरउसमेंएकतूफ़ान-ए-मुहीब
जागनाहैदेरतकयेभीअसरख़्वाबोंकाहै
वर्नाकटजातेहैंरोज़शबज़मानेकीतरह
जोभीथोड़ायाबहुतसमझोतोडरख़्वाबोंकाहै
  - Ain Tabish
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