ghubaar-e-jahaan men chhupe ba-kamaalon ki saf dekhta hooñ | ग़ुबार-ए-जहाँ में छुपे बा-कमालों की सफ़ देखता हूँ

  - Ain Tabish
ग़ुबार-ए-जहाँमेंछुपेबा-कमालोंकीसफ़देखताहूँ
मैंअहद-ए-गुज़िश्ताकेआशुफ़्तगाँकीतरफ़देखताहूँ
मैंसरकोछुपानेसेपहलेजहाँकाहदफ़देखताहूँ
महकतेहुएनेकफूलोंकोख़ंजर-ब-कफ़देखताहूँ
हैअंदरतलकएकनेज़ागुलूमैंकार-ए-वज़ूमें
तोइसहावमेंमैंकहाँपरहूँकिसकीतरफ़देखताहूँ
ज़मानेकीघातेंकिताबोंकीबातोंकोझुटलारहीहैं
मैंहैरतकामारातमाशाई-ए-इज़शरफ़देखताहूँ
पनहमिलपाईख़याल-ए-ख़ुदामेंजमाल-ए-ख़ुदीमें
मैंइसबेबसीमेंपरेशानसू-ए-नजफ़देखताहूँ
  - Ain Tabish
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