qalb ki banjar zameen par khwaahishein bote hue | क़ल्ब की बंजर ज़मीं पर ख़्वाहिशें बोते हुए

  - Ain Irfan
क़ल्बकीबंजरज़मींपरख़्वाहिशेंबोतेहुए
ख़ुदकोअक्सरदेखताहूँख़्वाबमेंरोतेहुए
दश्त-ए-वीराँकासफ़रहैऔरनज़रकेसामने
मो'जज़ेदरमो'जज़ेदरमो'जज़ेहोतेहुए
गामज़नहैंहममुसलसलअजनबीमंज़िलकीओर
ज़िंदगीकीआरज़ूमेंज़िंदगीखोतेहुए
कलमिरेहम-ज़ादनेमुझसेकियादिलकशसवाल
किसकोदेताहूँसदाएँरातभरसोतेहुए
अस्तहोताजारहाहैएकसूरजउसतरफ़
इसतरफ़वोदिखरहाहैफिरउदयहोतेहुए
  - Ain Irfan
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy