duniya men kise aag lagaani nahin aati | दुनिया में किसे आग लगानी नहीं आती

  - Aijaz Asad
दुनियामेंकिसेआगलगानीनहींआती
अफ़्सोसमगरसबकोबुझानीनहींआती
ता-हद्द-ए-नज़रदश्तहैक्यूँँबैठेहुएहो
लगताहैतुम्हेंख़ाकउड़ानीनहींआती
वोशोख़हैबातोंमेंलगारहताहैअक्सर
सुनताहूँमुझेबातबनानीनहींआती
बिस्तरकीज़रूरतहीनहींनींदकोप्यारे
क्याजिस्मकीचादरहीबिछानीनहींआती
बुझतीहीनहींआगलगीहैजोजिगरमें
लेकिनमिरेअश्कोंमेंरवानीनहींआती
ख़ुश्बूसेमहकतीहीनहींरातहमारी
ख़्वाबोंमेंअगररातकीरानीनहींआती
नादानमिरीमेज़केशीशेपेगिरेहैं
अश्कोंकोभीतस्वीरबनानीनहींआती
मैंख़ुदभीखिलौनोंकातरफ़-दाररहूँगा
जबतकमिरेबच्चोंपेजवानीनहींआती
मैंसिर्फ़हक़ीक़तहीबयाँकरताहूँ'एजाज़'
अफ़्सानानहींआताकहानीनहींआती
  - Aijaz Asad
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