ye kis karne ka fal hogaa kaisi rut men jaage ham | ये किस करनी का फल होगा कैसी रुत में जागे हम

  - Ahsan Yusuf Zai
येकिसकरनीकाफलहोगाकैसीरुतमेंजागेहम
तेज़नुकीलीतलवारोंकेबीचमेंकच्चेधागेहम
टहनीटहनीझूलरहीहैंलाशेंज़िंदापत्तोंकी
क्याइसनज़्ज़ारेकीख़ातिरजंगलजंगलभागेहम
जलतीधूपेंप्यासापंछीनहरकिनारेउतरेगा
जबभीकोईज़ख़्मदिखाहैअंगपियाकेलागेहम
अपनीहीपहचाननहींतोसाएकीपहचानकहाँ
चप्पाचप्पादीवारेंहैंक्यादेखेंगेआगेहम
सबकेआँगनझाँकनेवालेहमसेहीक्यूँँबैरतुझे
कबतकतेरारस्तादेखेंसारीरातकेजागेहम
  - Ahsan Yusuf Zai
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