sheeshe sheeshe ko paivast-e-jaan mat karo | शीशे शीशे को पैवस्त-ए-जाँ मत करो

  - Ahsan Yusuf Zai
शीशेशीशेकोपैवस्त-ए-जाँमतकरो
चंदतिनकोंकोइतनागराँमतकरो
रौशनीजिसजगहझाँकतीभीनहीं
उसअँधेरेकोतुमआसमाँमतकरो
एककमरेमेंरहनाहैसबकोयहाँ
गीलेपत्तेजलाकरधुआँमतकरो
दुश्मनीतोहवाओंमेंमौजूदहै
कोईज़हमतपएदोस्ताँमतकरो
क्यापताकिसकेदामनतलेआगहै
सबकेचेहरोंपेअपनागुमाँमतकरो
  - Ahsan Yusuf Zai
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