jidhar se vaadi-e-hairat men ham guzarte hain | जिधर से वादी-ए-हैरत में हम गुज़रते हैं

  - Ahsan Rizvi Danapuri
जिधरसेवादी-ए-हैरतमेंहमगुज़रतेहैं
उधरतोअहल-ए-तमन्नाभीकमगुज़रतेहैं
तिरेहुज़ूरजोअन्फ़ास-ए-ग़मगुज़रतेहैं
अजबहयातकेआलमसेहमगुज़रतेहैं
रवाँहैबर्क़काशो'लासहाब-ए-रहमतमें
नक़ाबडालकेअहल-ए-सितमगुज़रतेहैं
हयातरोकरहीहैकोईक़दमबढ़ाए
किआजमंज़िल-ए-हस्तीसेहमगुज़रतेहैं
ललकबढ़ाकेफ़क़तचंदबूँदबरसाके
रवाँ-दवाँसेसहाब-ए-करमगुज़रतेहैं
तअ'ज्जुबउनकेलिएमर्ग-ए-ना-गहानीका
जोज़िंदगीकेमराहिलसेकमगुज़रतेहैं
मुख़ालिफ़तहैखुलीअबदोस्ती'अहसन'
घुटीघुटीसीफ़ज़ाओंसेहमगुज़रतेहैं
  - Ahsan Rizvi Danapuri
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