main tha ik sham-e-sozaan raat bhar utha dhuaan mujh se | मैं था इक शम-ए-सोज़ाँ रात भर उट्ठा धुआँ मुझ से

  - Ahsan Ahmad Ashk
मैंथाइकशम-ए-सोज़ाँरातभरउट्ठाधुआँमुझसे
सुनीदुनियानेसौसौतरहदिलकीदास्ताँमुझसे
डुबोदीआबरू-ए-सोज़-ए-पिन्हाँतूनेआँखोंकी
शिकायतकररहेहैंक़तरा-हा-ए-राएगाँमुझसे
रफ़ीक़-ए-कारवान-ए-निगहत-ए-गुलहैमिरीवहशत
आगेबढ़सकेगीतूनिगाह-ए-बाग़बाँमुझसे
मुझेनींदगईथीराहकीठंडीहवाओंमें
मैंइकवामाँदाहूँपूछोहदीस-ए-कारवाँमुझसे
मिरेदिलकीतमन्नातुर्रा-ए-दस्तार-ए-गुलचींहो
औरउसपरयेक़यामतदादमाँगेबाग़बाँमुझसे
सरापामातम-ए-नज़्ज़ाराहैआँखोंकीमायूसी
किपर्दाउठचुकाहैऔरजल्वेहैंनिहाँमुझसे
  - Ahsan Ahmad Ashk
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy