vo rota dekh kah rahe hain muskuraaiye | वो रोता देख कह रहे हैं, मुस्कुराइए

  - Faiz Ahmad
वोरोतादेखकहरहेहैं,मुस्कुराइए
नयाबचश्मेंबहरहेहैं,मुस्कुराइए
उड़ातेथेहँसीग़मफ़िराक़पेपरअब
जुदाईहमभीसहरहेहैं,मुस्कुराइए
कोईवजहनहींबचीहैमुस्कुरानेकी
मगरवोजबभीकहरहेहैं,मुस्कुराइए
इकअश्क़केनिकलनेपरउदासक्यूँहोतुम
मिरेतोज़ख़्मबहरहेहैं,मुस्कुराइए
गुज़रथाआपकाहिसारदिलमें,उसकेअब
दरदिवारडहरहेहैं,मुस्कुराइए
जनाज़ाउठनेवालाहैहमारा,हमकोक्या
केहमतोअबभीकहरहेहैं,मुस्कुराइए
  - Faiz Ahmad
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