ik bhi baarish jo tire baad musalsal hui ho | इक भी बारिश जो तिरे बाद मुसलसल हुई हो

  - Faiz Ahmad
इकभीबारिशजोतिरेबादमुसलसलहुईहो
औरकभीहोभीगईहोतोमुकम्मलहुईहो
हैनहींबाब-ए-जहाँमेंकोईक़िस्साऐसा
जिस
में'आशिक़कीमोहब्बतभीमुकम्मलहुईहो
जबत'अल्लुक़रखाकुछदिनजोऔरउसनेयेलगा
चुकीथीजोमिरीमौतमुअत्तलहुईहो
उसकीइज़हार-ए-मोहब्बतमेंकरीहाँयूँँथी
जैसेइकउम्रसेउलझीपहेलीहलहुईहो
कलज़मींपरजोदिखाअपनाहीसायायेलगा
इकदरिंदेमेंभलीरूहमुकफ्फलहुईहो
उसनेजबजबदिलपत्थरपेरखेहाथअपने
मुझकोतबतबहुआमहसूसकेहल-चलहुईहो
उसनज़रमेंभलाकैसेनएअरमानखिलें
जोतुझेपानेकेअरमानोंकामक़तलहुईहो
  - Faiz Ahmad
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