tum se lad ke jo ghar gaya tha main | तुम से लड़ के जो घर गया था मैं

  - Faiz Ahmad
तुमसेलड़केजोघरगयाथामैं
फिरबिछड़नेसेडरगयाथामैं
जिसकेदिलमेंधड़कताथाहरपल
उसकेदिलसेउतरगयाथामैं
सिर्फ़मैंहीथालाशकेनज़दीक
अपनेकाँधोंपेघरगयाथामैं
पूछतीहोकेक्याहुआमिरेबाद
हरतरफ़सेबिखरगयाथामैं
देखकरजबउसेरकी़बकेसाथ
अपनेअंदरहीमरगयाथामैं
ऐसीतन्हाईखागईथीमुझे
अपनेसाएसेडरगयाथामैं
लगगईज़िन्दगीसमेटनेमें
रेजा़रेजा़बिखरगयाथामैं
क्याबताऊंँकहानीकाअंजाम
मरगईथीवोमरगयाथामैं
  - Faiz Ahmad
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