mire jazbaat jaane kidhar ga.e hain | मेरे जज़्बात जाने किधर गए हैं

  - Faiz Ahmad
मेरेजज़्बातजानेकिधरगएहैं
ऐसालगताहैमानोयेमरगएहैं
तेरीउल्फतकाज़ायकालेचुकेजो
अबवोसबलोगजानाँसुधरगएहैं
तुमसमझतीहोतोड़ाहैतुमनेहमको
जानटूटेनहींहैबिखरगएहैं
लेसकेकुछमिरेइश्क़सेतजुर्बा
ढूंडनेमुझकोफ़रहादघरगएहैं
खैरभीखैरियतमांगतीहैमेरी
औरइधरमुझ
मेंबससारेशरगएहैं
जोड़केजोरखेथेतिरेलिएबस
पलवोसारेतिरेबिनगुज़रगएहैं
दावाकरतेथेजोमरनेकाबिछड़कर
वोबिछड़करभीहमसेेसंवरगएहैं
आपअहमदसेमिलनेकोआएहैंक्या?
जीवोतोपिछलेहफ्तेगुज़रगएहैं
  - Faiz Ahmad
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