ehsaas ki manzil se guzar jaayega aaKHir | एहसास की मंज़िल से गुज़र जाएगा आख़िर

  - Ahmad Ziya
एहसासकीमंज़िलसेगुज़रजाएगाआख़िर
मुझमेंहैजोइंसानवोमरजाएगाआख़िर
इकदिनतोतिरीराहमेंपथराएँगीआँखें
येजिस्मभीरेज़ोंमेंबिखरजाएगाआख़िर
दोस्तयहाँअर्ज़-ए-हुनरजाँकाज़ियाँहै
तूगहरेसमुंदरमेंउतरजाएगाआख़िर
मैंरंग-ए-सहरतेरेलिएढूँडकेलाऊँ
तूशामकेमेलेमेंकिधरजाएगाआख़िर
  - Ahmad Ziya
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