yuñ zamaane men mira jism bikhar jaayega | यूँँ ज़माने में मिरा जिस्म बिखर जाएगा

  - Ahmad Zafar
यूँँज़मानेमेंमिराजिस्मबिखरजाएगा
मिरेअंजामसेहरफूलनिखरजाएगा
जामख़ालीहैसुराहीसेलहूबहताहै
आजकीरातवोमहताबकिधरजाएगा
सैल-ए-गिर्यामिरीआँखोंसेयेकहजाताहै
बस्तियाँरोएँतोदियाभीउतरजाएगा
तोकोईअब्र-ए-गुहर-बारसमुंदरकेलिए
दिलकेसहरासेजोचुप-चापगुज़रजाएगा
आजयेज़ुल्फ़-ए-परेशाँहैज़मानेकेलिए
कलयहीदौरकिसीतौरसँवरजाएगा
तेरीहरबातपेमरजाताहूँमरताभीनहीं
किमिरीमौतमेंइंसाँकोईमरजाएगा
अश्कमोतीसेबिखरजाएँगेराहोंमेंजहाँ
सू-ए-मंज़िलभीमिरादीदा-ए-तरजाएगा
मैंमकींहूँमकाँशहर-ए-मोहब्बतका'ज़फ़र'
दिलमुसाफ़िरकिसीग़ैरकेघरजाएगा
  - Ahmad Zafar
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