kya pata kis jurm ki kis ko saza deta hooñ main | क्या पता किस जुर्म की किस को सज़ा देता हूँ मैं

  - Ahmad Zafar
क्यापताकिसजुर्मकीकिसकोसज़ादेताहूँमैं
रंगसाइकबाँधताहूँफिरभुलादेताहूँमैं
अपनेआगेअबतोमैंख़ुदभीठहरसकतानहीं
सामनाहोतेहीचुटकीमेंउड़ादेताहूँमैं
मो'जिज़ाअगलातोअबशायदपुरानाहोचला
देखनाअबकेकोईचक्करनयादेताहूँमैं
मुझसेआगेभीनिकलजानाबहुतमुश्किलनहीं
आज-कलआहिस्ता-रौहूँरास्तादेताहूँमैं
शोरसाउठताहैऔरउठतेहीदबजाताहैअब
हर्फ़सालिखनेसेपहलेहीमिटादेताहूँमैं
ताकिमेरीसुल्ह-जूईकोलगेकुछभावभी
हरनएफ़ित्नेकोदर-पर्दाहवादेताहूँमैं
बातभीसुनतानहींहूँवस्लमेंदिलकी'ज़फ़र'
ऐसेख़र-मस्तोंकोमहफ़िलसेउठादेताहूँमैं
  - Ahmad Zafar
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