ye teraa khayal hai ki tu hai | ये तेरा ख़याल है कि तू है

  - Ahmad Zafar
येतेराख़यालहैकितूहै
जोकुछभीहैमेरीआरज़ूहै
दिलपहलूमेंजलरहाहैजैसे
येकैसीबहार-ए-रंग-ओ-बूहै
तक़दीरमेंशबलिखीगईथी
कहनेकोयेज़ुल्फ़-ए-मुश्कबूहै
वोदस्त-ए-ख़िज़ाँसेबचगयाहै
जिसफूलमेंरंगहैबूहै
पत्थरकोतराशकरभीदेखो
येफ़नभीख़ुदाकीजुस्तुजूहै
परदेसहैशहरशहरमेरा
अग़्यारकीजिसमेंआबरूहै
तक़्दीसकेसरमेंख़ाकदेखी
तहज़ीबकेहाथमेंसुबूहै
मैंजीनेसेतंगगयाहूँ
मौतसुबूतदेकितूहै
देखोतो'ज़फ़र'कहाँहैयारो
दीवानेकाज़िक्रकू-ब-कूहै
  - Ahmad Zafar
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