aur kya mire li.e arsa-e-mahshar hogaa | और क्या मेरे लिए अरसा-ए-महशर होगा

  - Ahmad Zafar
औरक्यामेरेलिएअरसा-ए-महशरहोगा
मैंशजरहूँगातिरेहाथमेंपत्थरहोगा
यूँँभीगुज़रेंगीतिरेहिज्रमेंरातेंमेरी
चाँदभीजैसेमिरेसीनेमेंख़ंजरहोगा
ज़िंदगीक्याहैकईबारयेसोचामैंने
ख़्वाबसेपहलेकिसीख़्वाबकामंज़रहोगा
हाथफैलाएहुएशामजहाँआएगी
बंदहोताहुआदरवाज़ा-ए-ख़ावरहोगा
मैंकिसीपासकेसहरामेंबिखरजाऊँगा
तूकिसीदौरकेसाहिलकासमुंदरहोगा
वोमिराशहरनहींशहर-ए-ख़मोशाँकीतरह
जिसमेंहरशख़्सकामरनाहीमुक़द्दरहोगा
कौनडूबेगाकिसेपारउतरनाहै'ज़फ़र'
फ़ैसलावक़्तकेदरियामेंउतरकरहोगा
  - Ahmad Zafar
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