falak pe chaand nahin koi abr-paaraa nahin | फ़लक पे चाँद नहीं कोई अब्र-पारा नहीं

  - Ahmad Zafar
फ़लकपेचाँदनहींकोईअब्र-पारानहीं
येकैसीरातहैजिसमेंकोईसितारानहीं
येइंकिशाफ़सितारोंसेभरगयादामन
किसीनेइतनाकहाजबकिवोहमारानहीं
ज़मींभँवरहोजहाँआसमाँसमुंदरहो
वहाँसफ़रकिसीसाहिलकाइस्तिआरानहीं
मैंमुख़्तलिफ़हूँज़मानेसेइसलिएशायद
किसीख़यालकीगर्दिशमुझेगवारानहीं
ख़िज़ाँकेमौसम-ए-ख़ामोशनेसदादीहै
जमाल-ए-दोस्तनेफिरभीमुझेपुकारानहीं
जोरेज़ारेज़ानहींदिलउसेनहींकहते
कहेंआईनाउसकोजोपारा-पारानहीं
मैंज़ख़्मज़ख़्मसहीफिरभीमुस्कुरायाहूँ
'ज़फ़र'ब-नाम-ज़फ़रहारकेभीहारानहीं
  - Ahmad Zafar
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