vasl ka beej bo nahin paaya | वस्ल का बीज बो नहीं पाया

  - Ahmad Tariq
वस्लकाबीजबोनहींपाया
रातज़िंदाथासोनहींपाया
फ़ानीदुनियाकेइसमुसाफ़िरने
वोभीखोयाहैजोनहींपाया
मेरीआँखोंमेंख़्वाबबस्तेहैं
ज़िंदगीभरमैंरोनहींपाया
रक़्सकरताहूँमैंउदासीमें
मैंनेमहबूबकोनहींपाया
उसनेमुझसेकहामिलो'अहमद'
औरमुझसेयेहोनहींपाया
  - Ahmad Tariq
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