raat guzri hai dar-b-dar ho kar | रात गुज़री है दर-ब-दर हो कर

  - Ahmad Sidiqi
रातगुज़रीहैदर-ब-दरहोकर
ज़िंदगीतुझसेबे-ख़बरहोकर
मुआ'फ़करनामिरेगुनाहोंको
ख़ुल्दजानाहैबे-ख़तरहोकर
शर्त-ए-अव्वलहैख़ाना-ए-दिलका
पाँवरखनाहैमो'तबरहोकर
तुझसेमलनेकीएकहसरतहै
कबगुज़रनाहैमेरेघरहोकर
उनसेचलनेकीज़िदकरो'अहमद'
नक़्शचूमूँगारहगुज़रहोकर
  - Ahmad Sidiqi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy