naye zamaanon ki chaap to sar pe aa khadi thii | नए ज़मानों की चाप तो सर पे आ खड़ी थी

  - Ahmad Shahryar
नएज़मानोंकीचापतोसरपेखड़ीथी
मिरीसमा'अतगुज़िश्ताअदवारमेंपड़ीथी
उधरदिएकाबदनहवासेथापारापारा
इधरअंधेरेकीआँखमेंइककिरनगड़ीथी
फ़लकपेथाआतिशींदरख़्तोंकाएकजंगल
औरउनदरख़्तोंकेबीचतारीकझोंपड़ीथी
समाईकिसतरहमेरीआँखोंकीपुतलियोंमें
वोएकहैरतजोआईनेसेबहुतबड़ीथी
जिसेपिरोयाथाअपनेहाथोंसेतेरेग़मने
सदा-ए-गिर्यामेंहिचकियोंकीअजबलड़ीथी
हमारीपलकोंपेरक़्सकरतेहुएशरारे
औरआसमाँमेंकहींसितारोंकीफुलजड़ीथी
तुलूअसुब्ह-ए-हज़ारख़ुर्शीदकीदु'आपर
बुझेचराग़ोंकीराखदामनपेपड़ीथी
सभीग़मींथेमिरेपियालेमेंज़हरपाकर
मैंमुतमइनथाकिमेरीतकमीलकीघड़ीथी
सवाल-ए-रुख़गुलिस्ताँमेंआयातोफूलठहरा
लबोंकीहसरतसुख़नमेंपहुँचीतोपंखुड़ीथी
येलोगतोउनदिनोंभीना-ख़ुशथे'शहरयारा'
किजिनदिनोंमेरेपासजादूकीइकछड़ीथी
  - Ahmad Shahryar
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