gham ke baadal hain ye dhal jaayenge rafta rafta | ग़म के बादल हैं ये ढल जाएँगे रफ़्ता रफ़्ता

  - Ahmad Shahid Khan
ग़मकेबादलहैंयेढलजाएँगेरफ़्तारफ़्ता
दीपहरगामपेजलजाएँगेरफ़्तारफ़्ता
आबला-पाईहीकाफ़ीहैतिरारख़्त-ए-सफ़र
ख़ारख़ुदगुलमेंबदलजाएँगेरफ़्तारफ़्ता
तूरपरकेज़राआपउठाएँतोनक़ाब
संग-ए-दिलबनकेपिघलजाएँगेरफ़्तारफ़्ता
चश्म-ए-साक़ीसेकहाँपीहैकिगिरकरउठें
जामसेपीहैसँभलजाएँगेरफ़्तारफ़्ता
सहीवस्लकोईवस्लकावा'दातोकरे
हमतोइसपरहीबहलजाएँगेरफ़्तारफ़्ता
  - Ahmad Shahid Khan
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