bujhti hui aankhoñ ka akela vo diya tha | बुझती हुई आँखों का अकेला वो दिया था

  - Ahmad Sajjad Babar
बुझतीहुईआँखोंकाअकेलावोदियाथा
हिज्राँकीकड़ीशबमेंअज़िय्यतसेलड़ाथा
रुकताहीनहींतुझपेनिगाहोंकातसलसुल
कलशामतिरेहाथमेंकंगनभीनयाथा
इकचश्म-ए-तवज्जोहसेउधड़ताहीगयाथा
वोज़ख़्मकिजिसकोबड़ीमेहनतसेसियाथा
बरगदकेइसीपेड़पेउतरेंगेपरिंदे
सैलाब-ज़दाघरकेजोआँगनमेंखड़ाथा
दरवेशकीकुटियाकेयेलाशेपेबनीहै
वीरानशिकस्तासीहवेलीपेलिखाथा
तस्वीरमेंउसकोहीसर-ए-बामदिखाया
मज़दूरज़मानेकेजोपाँवमेंपड़ाथा
वोज़ख़्मजुदाईकाभलाकैसेदिखेगा
मलबाजोमिरेजिस्मकाअंदरकोगिराथा
'बाबर'होकिबहकाहुआझोंकायासितारा
तेरीहीगलीमेंहमेंजातावोमिलाथा
  - Ahmad Sajjad Babar
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