aasmaan-zaad zameenon pe kahii naachte hain | आसमाँ-ज़ाद ज़मीनों पे कहीं नाचते हैं

  - Ahmad Sagheer Siddiqui
आसमाँ-ज़ादज़मीनोंपेकहींनाचतेहैं
हमवोपैकरहैंसर-ए-अर्श-ए-बरींनाचतेहैं
अपनायेजिस्मथिरकताहैबसअपनीधुनपर
हमकभीऔरकिसीधुनपेनहींनाचतेहैं
अपनेरंगोंकोतमाशेकाकोईशौक़नहीं
मोरजंगलमेंहीरहतेहैंवहींनाचतेहैं
तनकेडेरेमेंहैजाँमस्तक़लंदरकीतरह
वाहि
मेंथककेजोरुकतेहैंयक़ींनाचतेहैं
कबसेइकख़्वाबहैआँखोंमेंकिता'बीरभीहै
उसमेंगातेहैंमकाँऔरमकींनाचतेहैं
  - Ahmad Sagheer Siddiqui
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