vo be-niyaaz mujhe uljhnon men daal gaya | वो बे-नियाज़ मुझे उलझनों में डाल गया

  - Ahmad Rahi
वोबे-नियाज़मुझेउलझनोंमेंडालगया
किजिसकेप्यारमेंएहसास-ए-माह-ओ-सालगया
हरएकबातकेयूँँतोदिएजवाबउसने
जोख़ासबातथीहरबारहँसकेटालगया
कईसवालथेजोमैंनेसोचरक्खेथे
वोगयातोमुझेभूलहरसवालगया
जोउम्रजज़्बोंकासैलाबबनकेआईथी
गुज़रगईतोलगादौर-ए-ए'तिदालगया
वोएकज़ातजोख़्वाब-ओ-ख़याललाईथी
इसीकेसाथहरइकख़्वाबहरख़यालगया
उसेतोइसकाकोईरंजभीहोशायद
किउसकीबज़्मसेकोईशिकस्ता-हालगया
  - Ahmad Rahi
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