bujhti aankhoñ se mirii KHvaab kahaan jaata hai | बुझती आँखों से मिरी ख़्वाब कहाँ जाता है

  - Ahmad Nesar
बुझतीआँखोंसेमिरीख़्वाबकहाँजाताहै
अबमुझेलेकेयेसैलाबकहाँजाताहै
रूहतोकबसेपरेशाँहैनुमूकीख़ातिर
मुश्तभरख़ित्ता-ए-शादाबकहाँजाताहै
अपनीहस्तीमेंतोतूफ़ानखिंचेआतेहैं
हैजोपाँवमेंवोगिर्दाबकहाँजाताहै
उसकीतक़दीरमेंलिक्खाहैनमीमेंरहना
छोड़करआबकोसुरख़ाबकहाँजाताहै
अपनीतहज़ीबकाहमपासबहुतरखतेहैं
ग़ुस्सेमेंलहजा-ए-आदाबकहाँजाताहै
जागनामेरीनिगाहोंकामुक़द्दरहै'निसार'
आँखसेजल्वा-ए-महताबकहाँजाताहे
  - Ahmad Nesar
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