kahii vo mirii mohabbat men ghul raha hi na ho | कहीं वो मेरी मोहब्बत में घुल रहा ही न हो

  - Ahmad Nadeem Qasmi
कहींवोमेरीमोहब्बतमेंघुलरहाहीहो
ख़ुदाकरेउसेयेतजरबाहुआहीहो
सुपुर्दगीमिरामेआ'रतोनहींलेकिन
मैंसोचताहूँतिरेरूपमेंख़ुदाहीहो
मैंतुझकोपाकेभीकिसशख़्सकीतलाशमेंहूँ
मिरेख़यालमेंकोईतिरेसिवाहीहो
वोउज़्रकरकिमिरेदिलकोभीयक़ींआए
वोगीतगाकिजोमैंनेकभीसुनाहीहो
वोबातकरजिसेफैलाकेमैंग़ज़लकहलूँ
सुनाऊँशे'रजोमैंनेअभीलिखाहीहो
सहरकोदिलकीतरफ़येधुआँसाकैसाहै
कहींयेमेरादियारात-भरजलाहीहो
होकैसेजब्र-ए-मशीयतकोइसदु'आकालिहाज़
जोएकबारमिलेफिरकभीजुदाहीहो
येअब्र-ओ-किश्तकीदुनियामेंकैसेमुमकिनहै
किउम्र-भरकीवफ़ाकाकोईसिलाहीहो
मिरीनिगाहमेंवोपेड़भीहैबद-किर्दार
लदाहुआहोजोफलसेमगरझुकाहीहो
जोदश्तदश्तसेफूलोंकीभीकमाँगताथा
कहींवोतोड़केकश्कोलमरगयाहीहो
तुलू-ए-सुब्हनेचमकादिएहैंअब्रकेचाक
'नदीम'येमिरादामान-ए-मुद्दआ'हीहो
  - Ahmad Nadeem Qasmi
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