jee chahta hai falak pe jaaun | जी चाहता है फ़लक पे जाऊँ

  - Ahmad Nadeem Qasmi
जीचाहताहैफ़लकपेजाऊँ
सूरजकोग़ुरूबसेबचाऊँ
बसमेराचलेजोगर्दिशोंपर
दिनकोभीचाँदकोबुझाऊँ
मैंछोड़केसीधेरास्तोंको
भटकीहुईनेकियाँकमाऊँ
इम्कानपेइसक़दरयक़ींहै
सहराओंमेंबीजडालआऊँ
मैंशबकेमुसाफ़िरोंकीख़ातिर
मिशअलमिलेतोघरजलाऊँ
अशआ'रहैंमेरेइस्तिआरे
आओतुम्हेंआइनेदिखाऊँ
यूँँबटकेबिखरकेरहगयाहूँ
हरशख़्समेंअपनाअक्सपाऊँ
आवाज़जोदूँकिसीकेदरपर
अंदरसेभीख़ुदनिकलकेआऊँ
चारागरान-ए-अस्र-ए-हाज़िर
फ़ौलादकादिलकहाँसेलाऊँ
हररातदु'आकरूँँसहरकी
हरसुब्हनयाफ़रेबखाऊँ
हरजब्रपेसब्रकररहाहूँ
इसतरहकहींउजड़जाऊँ
रोनाभीतोतर्ज़-ए-गुफ़्तुगूहै
आँखेंजोरुकेंतोलबहिलाऊँ
ख़ुदकोतो'नदीम'आज़माया
अबमरकेख़ुदाकोआज़माऊँ
  - Ahmad Nadeem Qasmi
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