bazm-e-insaan men bhi ik raat basar kar dekho | बज़्म-ए-इंसाँ में भी इक रात बसर कर देखो

  - Ahmad Nadeem Qasmi
बज़्म-ए-इंसाँमेंभीइकरातबसरकरदेखो
एकबारअपनीज़मींपरभीउतरकरदेखो
इसउफ़ुक़परअगरजन्नत-ए-मौऊदामिली
इसउफ़ुक़तकभीजोचाहोतोसफ़रकरदेखो
कोईडूबीहुईकश्तीहैकिसाहिलकानिशाँ
अपनीसोचोंकेसमुंदरसेउभरकरदेखो
ख़ुदकोदेखोमिरेमेआ'रकेआईनेमें
इकज़रामुझपेयेएहसानभीधरकरदेखो
मौसम-ए-गुलहैतोकिरदार-ए-चमनक्यूँँबदले
आगफूलोंकोतोशबनमकोशररकरदेखो
हरज़मानेमेंबुझेतोनहींरहतेख़ुर्शेद
गर्दिशोआजमिरीशबकोसहरकरदेखो
  - Ahmad Nadeem Qasmi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy