शाम-ए-ग़मयादहैकबशम्अ'जलीयादनहीं
कबवोरुख़्सतहुएकबरातढलीयादनहीं
दिलसेबहतेहुएपानीकीसदागुज़रीथी
कबधुँदलकाहुआकबनावचलीयादनहीं
ठंडेमौसममेंपुकाराकोईहमआतेहैं
जिसमेंहमखेलरहेथेवोगलीयादनहीं
इनमज़ाफ़ातमेंछुपछुपकेहवाचलतीथी
कैसेखिलतीथीमोहब्बतकीकलीयादनहीं
जिस्म-ओ-जाँडूबगएख़्वाब-ए-फ़रामोशीमें
अबकोईबातबुरीहोकिभलीयादनहीं