यूँँदेखनेमेंतोबसख़ाक-ए-मुख़्तसरहूँमैं
मुझेकुरेदकभीख़ुदमेंबहर-ओ-बरहूँमैं
अज़लसेता-ब-अबदफैलीहैंजड़ेंमेरी
कभीनआईख़िज़ाँजिसपेवोशजरहूँमैं
हैबा'द-ए-ख़ुल्द-बदरइकअज़ाब-ए-दर-बदरी
जिसेतलाशहैमंज़िलकीवोख़िज़रहूँमैं
कभीनिगाहोंमेंहोताहैआलम-ए-बाला
कभीवजूदसेहीअपनेबे-ख़बरहूँमैं
हैज़ातमेरीकभीतोसभीदुखोंकाइलाज
कभीलगेहैकितिरयाक़-ए-बे-असरहूँमैं
मिरेवजूदपेहैमुनहसिरतिरीतादाद
अगरचेतेरीनज़रमेंबसइकसिफ़रहूँमैं
समझकेहर्फ़-ए-मुकर्ररजोलौह-ए-हस्तीपर
ज़मानागरचेहैमुनकिरमिरामगरहूँमैं
नहींहैबज़्म-ए-ख़िरदमेंजोमेरीक़द्रतोक्या
निगाह-ए-अहल-ए-जुनूँमेंतोमो'तबरहूँमैं
मिरीज़बान-ए-सदाक़तकाजुर्महै'ख़ावर'
ज़मानामुझकोसमझताहैख़ीरा-सरहूँमैं