yaadon ka ik deepak dil men baith ke roz jalata hooñ | यादों का इक दीपक दिल में बैठ के रोज़ जलाता हूँ

  - Ahmad Muneeb
यादोंकाइकदीपकदिलमेंबैठकेरोज़जलाताहूँ
देखकेतेरीतस्वीरोंकोरोताहँसतागाताहूँ
मोमिनऐसाहूँकिपहलेजामपेजामलगाताहूँ
जाकेफिरसज्देमेंरबकोअपनाहालसुनाताहूँ
हिज्रनेतेरेहालतमेरीऐसीकरदीहैकेअब
दोदिनसोयारहताहूँऔरदोदिनकामपेजाताहूँ
दरियासूरजचाँदसितारेक़ौस-ओ-क़ुज़हसबअपनीजगह
लेकिनवोइकलम्हाजबमैंतुझसेहाथमिलाताहूँ
आधीशबकासन्नाटाहैउसमेंजुगनूऔरइकझील
ऐसेमंज़रदेखकेअक्सरख़ुदमेंगुमहोजाताहूँ
इश्क़वहीसच्चाहैजिसमेंमंज़िलकीतमसीलहो
ऐसेवैसेजुमलेकहकरख़ुदकोमैंबहलाताहूँ
  - Ahmad Muneeb
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