subh se thoda idhar aur gaii raat ke ba'ad | सुब्ह से थोड़ा इधर और गई रात के बा'द

  - Ahmad Muneeb
सुब्हसेथोड़ाइधरऔरगईरातकेबा'द
लौटआयाहूँदरख़्तोंसेमुलाक़ातकेबा'द
इश्क़मेंरंगनहींनस्लनहींशजरानहीं
उसकाआग़ाज़हैइनसबकेमज़ाफ़ातकेबा'द
अब्रबरसेतोखिलउठतीहैज़मींकीख़ुशबू
ख़ुशियाँमिलतीहैंहमेशाकईसदमातकेबा'द
लुत्फ़हैमाँगनेमेंइसलिएहममाँगतेहैं
हमकोमतलबनहींक्याहोगामुनाजातकेबा'द
बातहैरतकीतोयेहैकेबदलजातीहै
मेरीऔक़ाततिरेहिज्रकेऔक़ातकेबा'द
  - Ahmad Muneeb
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