andhera sa kya tha ubalta hua | अँधेरा सा क्या था उबलता हुआ

  - Ahmad Mahfuz
अँधेरासाक्याथाउबलताहुआ
किफिरदिनढलेहीतमाशाहुआ
यहींगुमहुआथाकईबारमैं
येरस्ताहैसबमेरादेखाहुआ
देखोतुमइसनाज़सेआईना
किरहजाएवोमुँहहीतकताहुआ
जानेपस-ए-कारवाँकौनथा
गयादूरतकमैंभीरोताहुआ
कभीऔरकश्तीनिकालेंगेहम
अभीअपनादरियाहैठहराहुआ
जहाँजाओसरपरयहीआसमाँ
येज़ालिमकहाँतकहैफैलाहुआ
  - Ahmad Mahfuz
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