hawa ka shor to aaj aur bhi ziyaada hai | हवा का शोर तो आज और भी ज़ियादा है

  - Ahmad Irfan
हवाकाशोरतोआजऔरभीज़ियादाहै
चराग़ाँआँखमेंकरलोअगरइरादाहै
मैंरहगुज़रमेंकहींपरबिखरहीजाऊँगा
येमेरीरूहपेमिट्टीकाइकलबादाहै
बहुतदिनोंकीमसाफ़तकेबा'दमुझपेखुला
किचलरहाहूँमेंजिसपरउजाड़जादाहै
येतेराज़र्फ़नहींतंग-ओ-तारघाटीनहीं
येमेरेदिलकाहैरस्ताभीऔरकुशादाहै
उसेतोकुछनहींमा'लूमदुनिया-दारीका
मिज़ाजकातिरा'अहमद'भीकितनासादाहै
  - Ahmad Irfan
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